एक पैर से स्कूल जाने वाली बलिया की रागिनी को CM योगी का सहारा, इलाज, पढ़ाई और घर तक सड़क का दिया भरोसा
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शनिवार, 12 सितंबर 2026 | 11:16 AM
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की साहसी और होनहार बच्ची रागिनी की जिजीविषा और पढ़ने के अटूट जज्बे ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में Ragini Ballia CM Yogi Adityanath मुलाकात की खबरें सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में छाई हुई हैं। महज छह महीने की उम्र में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना के कारण अपना पैर गंवाने के बावजूद, मनियर क्षेत्र के दिघेड़ा गांव निवासी और प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक की छात्रा सात वर्षीय रागिनी रोजाना एक पैर के सहारे 400 मीटर कूद-कूदकर स्कूल जाती थी। जब उसका यह अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुआ, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका तुरंत संज्ञान लिया और रागिनी को उसके परिवार सहित लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री आवास पर भावुक मुलाकात और महत्वपूर्ण घोषणाएं
गुरुवार शाम करीब सात बजे बांसडीह की विधायक केतकी सिंह के नेतृत्व में रागिनी, उसके पिता देवेंद्र राजभर और माता बबिता राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने रागिनी को दुलारते हुए उसके समुचित इलाज, गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा, परिवार के लिए पक्के आवास और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि राज्य सरकार प्रदेश के हर जरूरतमंद और दिव्यांग बच्चे के सपनों को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य में संवेदनशील सुशासन की यह पहली मिसाल नहीं है; हाल ही में जिस तरह CM योगी आदित्यनाथ ने उचित दर विक्रेताओं का लाभांश 35 रुपये प्रति कुंतल बढ़ाया था, उसी प्रशासनिक तत्परता के साथ अब रागिनी के जीवन को भी सुदृढ़ बनाने की पहल की गई है।
गांव तक बनेगी पक्की सड़क, रागिनी के नाम पर होगा नामकरण
रागिनी के गांव दिघेड़ा (मनियर क्षेत्र, बलिया) में उसके घर तक पहुंचने वाली सड़क जर्जर और दुर्गम स्थिति में थी, जिससे एक पैर के सहारे चलने वाली इस मासूम को स्कूल पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलाकात के दौरान ही प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि रागिनी के घर तक तुरंत पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। विधायक केतकी सिंह ने बताया कि इस निर्मित होने वाली सड़क का नामकरण स्वयं रागिनी के नाम पर किया जाएगा, ताकि यह भावी पीढ़ियों के लिए लगन और हौसले का जीवंत प्रतीक बन सके। उत्तर प्रदेश सरकार की यह त्वरित निर्णय क्षमता वैसी ही है जैसे संकट के समय गंगा-यमुना समेत कई नदियां उफान पर होने पर यूपी के दर्जनों जिलों में अलर्ट जारी कर पूरा प्रशासनिक अमला जमीनी राहत में उतार दिया जाता है।
जिला प्रशासन की पहल और चिकित्सकीय उपचार की राह
इंटरनेट पर रागिनी का वीडियो वायरल होने के बाद बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रारंभिक स्तर पर त्वरित कदम उठाए थे। जिला प्रशासन के प्रयास से रागिनी को तत्काल ट्राई-साइकिल और अन्य प्राथमिक सुविधाएं दी गई थीं। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा मामले का स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद अब रागिनी के पैर का उच्च स्तरीय चिकित्सकीय उपचार और आधुनिक कृत्रिम अंग (प्रोस्थेटिक लिंब) लगाने की राह भी आसान हो गई है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श होता रहता है, जहां एक ओर पंजाब और गुजरात के स्कूलों के कंपटीशन की राजनीति देखने को मिलती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत में रागिनी जैसी बालिकाओं को प्रत्यक्ष सरकारी संरक्षण मिलना प्राथमिक शिक्षा प्रणाली के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाता है।
संघर्ष की मिसाल बनी सात साल की रागिनी
रागिनी के पिता देवेंद्र राजभर और माता बबिता राजभर ने मुख्यमंत्री से मिलने के बाद बेहद भावुक होकर बताया कि दुर्घटना के बाद दोनों पैरों की अक्षमता के बावजूद रागिनी ने कभी पढ़ाई से मुंह नहीं मोड़ा। उसमें शिक्षा प्राप्त करने की ऐसी तीव्र इच्छा थी कि वह कठिन रास्ते पर भी रोज एक पैर से उछलते हुए 400 मीटर की दूरी तय कर स्कूल पहुंचती थी। जब हम ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखते हैं कि 1947 में भारत की आबादी करीब 34 करोड़ थी जो 2026 में 147 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, तो इतने बड़े और विविधता भरे देश में अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक और विशेष रूप से दिव्यांग बालिकाओं तक सामाजिक न्याय और संबल पहुंचाना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
निष्कर्ष: उम्मीद, संबल और स्वावलंबन की नई सुबह
लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान विधायक केतकी सिंह, विधायक प्रतिनिधि विश्राम सिंह, नीरज दुबे, चुन्नू सिंह, राजेश सिंह, सुनील राय, लोकनाथ पासवान, राकेश चौहान, विमल और दीपू सहित रागिनी के माता-पिता उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री की ओर से समुचित इलाज, मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पक्के आवास, आर्थिक सहायता और घर तक सड़क निर्माण का ठोस भरोसा मिलने के बाद रागिनी के पूरे गांव और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। रागिनी के परिजनों को अब पूरा विश्वास है कि सरकारी मदद के दम पर उनकी बेटी अपनी शारीरिक बाधाओं को पार कर अपने सभी सपनों को पूरा करेगी और देश का नाम रोशन करेगी।
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