स्क्रब टाइफस बुखार: हर तेज बुखार को डेंगू न समझें, डॉ. राहुल खन्ना ने दी सतर्क रहने की सलाह
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • बुधवार, 16 सितंबर 2026 | 11:19 AM
देश भर में वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगता है। ऐसे समय में जब अस्पतालों में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तो तेज बुखार और प्लेटलेट्स घटने पर अधिकांश लोग इसे स्वतः ही डेंगू मान लेते हैं। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि स्क्रब टाइफस बुखार भी एक गंभीर और संभावित जानलेवा संक्रमण है जिसके लक्षण डेंगू से काफी मिलते-जुलते हैं। एक तरफ जहां देश में विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों की चर्चा है, जैसे उत्तर प्रदेश में CM योगी का हर घर तिरंगा अभियान तेज हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य क्षेत्र में मानसूनी बीमारियों से निपटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मानसून में बढ़ता खतरा: हर तेज बुखार डेंगू नहीं
नई दिल्ली के जहांगीरपुरी स्थित बंसल ग्लोबल हॉस्पिटल के प्रतिष्ठित फैमिली व जनरल फिजिशियन डॉ. राहुल खन्ना ने 'देश की पत्रिका' से विशेष बातचीत में बताया कि पंजाब और उत्तरी भारत के कई राज्यों में इन दिनों स्क्रब टाइफस बुखार के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुखार के साथ रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम होना केवल डेंगू का संकेत नहीं है। जनसामान्य में यह भ्रांति है कि प्लेटलेट्स गिरते ही मरीज डेंगू से पीड़ित है, जबकि यह स्थिति स्क्रब टाइफस संक्रमण में भी उत्पन्न हो सकती है।
देश के विभिन्न राज्यों में राजनीतिक गतिविधियों और प्रशासनिक फेरबदल के दौर के बीच—जैसे उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठन में बड़े बदलाव के बीच तेजपाल नागर की सक्रियता देखने को मिल रही है—स्वास्थ्य विभागों ने भी जिला स्तर पर स्क्रब टाइफस की निगरानी बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में इसका जोखिम सबसे अधिक देखा जा रहा है।
स्क्रब टाइफस क्या है और यह कैसे फैलता है?
डॉ. राहुल खन्ना के अनुसार, स्क्रब टाइफस को चिकित्सकीय भाषा में 'बुश टाइफस' (Bush Typhus) भी कहा जाता है। यह संक्रमण 'ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी' नामक जीवाणु (बैक्टीरिया) के कारण होता है। यह जीवाणु सूक्ष्म कीटों, विशेष रूप से 'चिगर्स' (Chiggers - लार्वल माइट्स) के काटने से मनुष्यों में फैलता है। ये कीट मुख्य रूप से घनी वनस्पतियों, झाड़ियों, खेतों, जंगलों और घास वाले स्थानों में पनपते हैं।
संक्रमण का तरीका और प्रसार का दायरा
डॉक्टर खन्ना ने एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की कि यह रोग कोरोना वायरस या इन्फ्लूएंजा की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे स्पर्श या हवा के माध्यम से नहीं फैलता है। यह केवल संक्रमित चिगर्स कीट के काटने से ही शरीर में प्रवेश करता है। यद्यपि इसके मामले मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्रों में अधिक दर्ज किए जाते हैं, परंतु हाल के वर्षों में शहरी पार्कों और घने पेड़-पौधों वाले आवासीय क्षेत्रों में भी इसके मामले देखे गए हैं।
प्रारंभिक लक्षण और पहचान: 'एस्कर' (काले निशान) का महत्व
संक्रमण के शुरुआती 10 से 12 दिनों के भीतर मरीज में लक्षण उभरने शुरू होते हैं। प्रारंभ में यह साधारण फ्लू जैसा प्रतीत होता है, जिससे मरीज और उनके परिजन अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। स्क्रब टाइफस बुखार के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
- अचानक तेज बुखार आना और ठंड लगना
- तीव्र सिरदर्द और मांसपेशियों में जकड़न व दर्द
- शरीर में अत्यधिक थकान और जोड़ों का दर्द
- गले में खराश और कुछ मामलों में उल्टी या दस्त
जिस तरह राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचलें बनी रहती हैं—जैसे संसद से लेकर प्रांतीय राजनीति में NDA में गए टीएमसी सांसद असहज होने और वापसी की अटकलें लगा रहे हैं, अथवा पूर्व-पूर्वी भारत में बंगाल चुनाव 2026: TMC vs BJP की जंग तेज हो रही है—ठीक उसी प्रकार चिकित्सा जगत् में भी इस बीमारी के सटीक निदान पर लगातार मंथन चल रहा है।
मुख्य पहचान: त्वचा पर काला चकत्ता (Eschar)
डॉ. राहुल खन्ना ने बताया कि स्क्रब टाइफस की सबसे विशिष्ट पहचान 'एस्कर' (Eschar) है। जिस स्थान पर चिगर्स कीट ने काटा होता है, वहां कुछ दिनों में एक छोटा सा छाला बनता है जो बाद में सूखे काले चकत्ते (सिगरेट से जले जैसे निशान) में बदल जाता है। यह निशान अक्सर जांघों, कांख (अंडरआर्म्स), कमर या शरीर के ढके हुए हिस्सों पर दिखाई देता है। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह संक्रमण यकृत (लिवर), गुर्दे (किडनी), फेफड़ों और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है, जिससे मरीज कोमा में जा सकता है या बहु-अंग विफलता (Multi-organ Failure) का शिकार हो सकता है।

बचाव के व्यावहारिक उपाय और जनहित निर्देश
सार्वजनिक जीवन में जिस प्रकार नागरिक अधिकारों और मांगों के लिए आवाज उठाई जाती है, जैसे हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी जंतर-मंतर विरोध तेज हुआ था या स्थानीय स्तर पर हर्रैया में 2027 से पहले टिकट की जंग तेज देखने को मिलती है, उसी प्रकार स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति व्यक्तिगत सतर्कता भी नागरिक जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।
डॉ. राहुल खन्ना ने आमजन को निम्नलिखित सुरक्षात्मक कदम उठाने की सलाह दी है:
- पूर्ण वस्त्र पहनें: झाड़ियों, खेतों या पार्कों में जाते समय पूरी आस्तीन के कपड़े, लंबी पैंट और जूते पहनें ताकि त्वचा ढकी रहे।
- कीट रोधक (Insect Repellents): खुले अंगों और कपड़ों पर डॉक्टर द्वारा अनुशंसित मॉस्किटो व माइट रिपेलेंट क्रीम का प्रयोग करें।
- झाड़ियों और जमा पानी से दूरी: घर के आसपास घास और झाड़ियों की नियमित छंटाई करें तथा नमी वाले स्थानों पर सफाई बनाए रखें।
- बिस्तर और कपड़ों की सफाई: बाहर से लौटने के बाद कपड़ों को गर्म पानी में धोएं और स्वयं स्नान करें।
निष्कर्ष एवं चिकित्सकीय परामर्श
चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि मानसून के मौसम में किसी भी तेज बुखार को नजरअंदाज न करें और न ही बिना डॉक्टरी सलाह के स्वयं दवा (Self-medication) लें। स्क्रब टाइफस बुखार का शुरुआती दौर में सही एंटीबायोटिक दवाओं (जैसे डॉक्सीसाइक्लिन) से पूर्णतः और तेजी से इलाज संभव है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को बुखार के साथ शरीर पर कोई काला निशान दिखाई दे, तो तुरंत निकटतम योग्य चिकित्सक या अस्पताल में संपर्क कर एलीसा (ELISA) या आवश्यक रक्त जांच कराएं। सतर्कता और समय पर लिया गया सही निर्णय ही आपको और आपके परिवार को इस मानसूनी खतरे से सुरक्षित रख सकता है।