गन्ना किसानों के मुद्दों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रालोद सांसद विधायक मुलाकात, बकाया भुगतान और मूल्य वृद्धि पर ठोस आश्वासन
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 11:48 AM
गन्ना मूल्य में वृद्धि और समयबद्ध भुगतान की मांग
राष्ट्रीय लोकदल के सांसदों और विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष यह बात मजबूती से रखी कि डीजल, खाद, बीज, कीटनाशक और कृषि मजदूरी की लागत में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। ऐसे में गन्ने के समर्थन मूल्य में समुचित बढ़ोतरी करना समय की मांग है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि आगामी पेराई सत्र के शुरू होने से पहले गन्ना मूल्य घोषित किया जाए और इसमें प्रति क्विंटल सम्मानजनक वृद्धि की जाए ताकि किसानों की आय में वास्तविक सुधार हो सके।
इसके साथ ही कानून के अनुसार 14 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित कराने की व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर बल दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर चीनी मिलें भुगतान नहीं करती हैं, तो उनसे ब्याज सहित राशि वसूल कर किसानों के खातों में अंतरित की जानी चाहिए।
आगामी पेराई सत्र से पूर्व भुगतान कराने का मुख्यमंत्री का आश्वासन
थानाभवन के रालोद विधायक अशरफ अली खान ने बैठक के पश्चात जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों और गन्ना किसानों की समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि आगामी गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से ठीक पहले सभी चीनी मिलों से बकाया भुगतान कराने के लिए सरकार ठोस कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों और चीनी मिल प्रबंधन को कड़े निर्देश जारी करने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी चीनी मिल को किसानों के पसीने की कमाई को दबाकर बैठने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी व कृषि समीकरणों पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ रालोद सांसद विधायक मुलाकात केवल एक प्रशासनिक वार्ता नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और राजनीतिक मायने भी हैं। राष्ट्रीय लोकदल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर यह पहली बड़ी संयुक्त पहल मानी जा रही है। जिस तरह से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी हलचल और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, ऐसे में रालोद का किसानों के मुद्दे पर सीधे मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कराना यह दर्शाता है कि गठबंधन में कृषि हित सर्वोपरि हैं।
पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से गन्ना खेती पर निर्भर है। शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ और बुलंदशहर जैसे जिलों में गन्ना भुगतान एक अत्यधिक संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। सरकार द्वारा इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करने से क्षेत्र के किसानों में सकारात्मक संदेश जाने की उम्मीद है।
किसानों की उम्मीदें और प्रशासनिक तंत्र की भावी दिशा
मुख्यमंत्री के सकारात्मक आश्वासन के बाद अब थानाभवन, जलालाबाद और पूरे शामली जिले के गन्ना किसानों में बकाया धन मिलने की आस जगी है। किसान संगठनों ने भी उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही बजाज मिल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर उनके बकाया पैसों का भुगतान सुनिश्चित कराएगी।
आगामी दिनों में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग द्वारा चीनी मिलों की संपत्ति की टैगिंग, चीनी बिक्री के एस्क्रो अकाउंट की निगरानी और बकायेदारों के खिलाफ आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस पूरी कवायद से न केवल किसानों को उनका हक मिलेगा, बल्कि राज्य में चीनी उद्योग के नियमन में भी पारदर्शिता आएगी।
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