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Saturday, 22 Aug 2026

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का हाई-स्पीड ट्रायल सफल: 120 KM/H की रफ्तार से दौड़ी, जल्द जींद-सोनीपत रूट पर होगी शुरू

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने दिल्ली-जींद सेक्शन पर फाइनल हाई-स्पीड ट्रायल में 120 KM/H की रफ्तार हासिल की। RDSO निगरानी में हुए इस सफल परीक्षण के बाद जींद-सोनीपत रूट पर जल्द कमर्शियल सेवा शुरू होगी।

 

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने दिल्ली-जींद सेक्शन पर अपना फाइनल हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस परीक्षण में ट्रेन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी। Research Designs and Standards Organisation (RDSO) की तकनीकी टीम की निगरानी में हुए इस ट्रायल में ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन क्षमता और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स की जांच की गई।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित यह ट्रेन पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है — इससे न धुआं निकलता है और न कोई शोर। सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा तो अगले महीने से यह ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी।

हाइड्रोजन ट्रेन हाई-स्पीड ट्रायल में क्या-क्या जांचा गया?

दिल्ली-जींद सेक्शन पर हुए इस फाइनल ट्रायल में ट्रेन की तकनीकी क्षमताओं को कई मानकों पर परखा गया। RDSO की टीम ने ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, ट्रैक पर स्थिरता और वाइब्रेशन लेवल की बारीकी से जांच की। साथ ही टेक्निकल कैपेबिलिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को भी परखा गया।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन का लो-स्पीड ट्रायल भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका था। अब हाई-स्पीड ट्रायल में 120 KM/H की रफ्तार हासिल करने के बाद ट्रेन को कमर्शियल सर्विस की मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

विशेषता विवरण
ट्रायल सेक्शन दिल्ली – जींद
अधिकतम ट्रायल स्पीड 120 किमी प्रति घंटा
तकनीक हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन
प्रोपल्शन क्षमता 1200 KW
कमर्शियल अधिकतम स्पीड 75 किमी प्रति घंटा
कोच संख्या 10 कोच
प्रस्तावित रूट जींद – सोनीपत (हरियाणा)
ट्रायल निगरानी RDSO (Research Designs and Standards Organisation)
उत्सर्जन सिर्फ पानी और भाप — शून्य प्रदूषण

ग्रीन टेक्नोलॉजी की मिसाल: कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?

हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन गैस, वायुमंडल की ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली उत्पन्न करती है और इस पूरी प्रक्रिया में केवल पानी और भाप निकलती है। यानी न धुआं, न कार्बन उत्सर्जन, और न ही कोई शोर-प्रदूषण।

यह तकनीक उन रेलवे सेक्शनों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहां अभी तक ओवरहेड वायरिंग नहीं है। ऐसे इलाकों में डीजल इंजन के बजाय हाइड्रोजन ट्रेन एक स्वच्छ और किफायती विकल्प बन सकती है।

जींद-सोनीपत रूट पर जल्द दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन, रेल मंत्रालय ने दी मंजूरी

रेल मंत्रालय के अनुसार, 27 मई को नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन चलाने की औपचारिक मंजूरी दे दी गई। मंत्रालय ने बताया कि यह ट्रेन 1200 KW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से लैस होगी और कमर्शियल सेवा में 75 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलेगी।

नीले रंग की यह ट्रेन जींद-सोनीपत के यात्रियों के लिए एक बिल्कुल नया और पर्यावरण-अनुकूल सफर का अनुभव लेकर आएगी। हाई-स्पीड ट्रायल सफल होने के बाद अब कमर्शियल सर्विस की मंजूरी की प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद है।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का यह सफल हाई-स्पीड ट्रायल देश के रेलवे इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। RDSO की तकनीकी मंजूरी और रेल मंत्रालय की स्वीकृति के बाद जींद-सोनीपत सेक्शन पर यह ट्रेन जल्द ही आम यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी — और भारतीय रेलवे के ग्रीन मिशन को एक नई पहचान देगी।


लेखक परिचय

लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता

विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स

संपादकीय नोट: यह लेख भारतीय जनता पार्टी, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आधिकारिक पत्र और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।