पुष्कर सिंह धामी की जीवनी: छात्र राजनीति से उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री तक का सफर
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 | 03:44 PM
प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
पुष्कर सिंह धामी की जीवनी: उत्तराखंड की राजनीति में 'धाकड़ धामी' के नाम से अपनी खास पहचान बना चुके पुष्कर सिंह धामी देश के प्रमुख युवा नेताओं में गिने जाते हैं। 45 वर्ष की उम्र में उत्तराखंड के 11वें और सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने वाले धामी ने अपने फैसलों और काम करने के तरीके से प्रदेश की राजनीति पर गहरा असर छोड़ा है। आज के समय में हर कोई पुष्कर सिंह धामी की जीवनी को गहराई से जानना चाहता है।
पुष्कर सिंह धामी की जीवनी की शुरुआत पिथौरागढ़ जिले से होती है। उनका जन्म 16 सितंबर 1975 को सीमांत जिले पिथौरागढ़ के तुणखोल गांव में हुआ था। वे एक अनुशासित सैन्य परिवार से आते हैं। उनके पिता शेर सिंह धामी भारतीय सेना में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए, जबकि माता विश्ना देवी एक गृहिणी हैं। बचपन से ही घर में मिले सैन्य अनुशासन और देवभूमि की मिट्टी से लगाव ने उनके भीतर देश सेवा और सादगी के संस्कार भरे।
उनका विवाह गीता धामी से हुआ है, जो खुद भी सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रहती हैं। पारिवारिक संस्कार और सादगी पुष्कर सिंह धामी की जीवनी का मुख्य आधार रहे हैं। वे अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों और जमीनी आयोजनों में जनता के बीच नजर आते हैं। हाल ही में उन्होंने नशामुक्त उत्तराखंड वॉकथॉन में युवाओं को नशा मुक्ति का संकल्प दिलाया था।
शैक्षणिक योग्यता और छात्र राजनीति से शुरुआत
शिक्षा की बात करें तो पुष्कर सिंह धामी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव और सैन्य माहौल के बीच पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए वे लखनऊ विश्वविद्यालय चले गए। उन्होंने 1999 में मानव संसाधन प्रबंधन और अंतर्राष्ट्रीय संबंध (HRM & IR) में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद अपनी प्रशासनिक और कानूनी समझ बढ़ाने के लिए उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से ही कानून (LL.B) की पढ़ाई की।
छात्र जीवन ही पुष्कर सिंह धामी की जीवनी का वह मोड़ था जिसने उन्हें राजनीति की राह दिखाई:
- विद्यार्थी राजनीति (1990 का दशक): अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने छात्र हित और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक आवाज उठाई।
- प्रशासनिक अनुभव (2001): वर्ष 2001 में उन्हें उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का मुख्य राजनीतिक सलाहकार बनाया गया। यहाँ से उन्होंने शासन चलाने के तरीके सीखे।
- युवा मोर्चा का नेतृत्व (2002 - 2008): भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दो बार जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने राज्य भर में विशाल युवा रैलियां आयोजित कीं।
संसदीय सफर और मुख्यमंत्री पद तक पहुँचने की कहानी
विधायक के रूप में उनकी यात्रा उधम सिंह नगर की खटीमा सीट से शुरू हुई। 2012 में वे पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद 2017 में भी खटीमा की जनता ने उन पर भरोसा जताया और वे दोबारा जीतकर विधानसभा पहुंचे।
जुलाई 2021 में राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद 4 जुलाई 2021 को 45 साल की उम्र में पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत हासिल किया। हालांकि वे खुद अपनी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया। इसके बाद उन्होंने चंपावत उपचुनाव में रिकॉर्ड 55,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
हाल के समय में वे कई बड़े मंचों पर भी दिखाई दिए हैं। हाल ही में देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति और साहित्य को बढ़ावा देने पर बात की। इसके अलावा पीएम किसान उत्सव दिवस पर सीएम धामी ने किसानों के कल्याण के लिए कई योजनाओं की जानकारी दी।
पुष्कर सिंह धामी: एक नज़र में (मुख्य जानकारी)
यदि हम पुष्कर सिंह धामी की जीवनी के प्रमुख आंकड़ों और तथ्यों को देखें, तो उनकी स्थिति इस प्रकार है:
- पूरा नाम: पुष्कर सिंह धामी
- जन्म तिथि: 16 सितंबर 1975 (पिथौरागढ़)
- राजनीतिक दल: भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- वर्तमान पद: मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
- विधानसभा क्षेत्र: चंपावत
- कुल संपत्ति: लगभग ₹2.85 करोड़ (कुल परिसंपत्तियां ₹3.35 करोड़, देयताएं ₹49.68 लाख)
पक्ष-विपक्ष की तुलना और आम नागरिक पर असर
पुष्कर सिंह धामी की जीवनी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनके कड़े और ऐतिहासिक फैसले हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राज्यहित में कई बड़े कानून बनाए:
- समान नागरिक संहिता (UCC): उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता लागू करने का बड़ा कदम उठाया।
- देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून: प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की।
- कड़ा धर्मांतरण विरोधी कानून: राज्य की संस्कृति और जनसांख्यिकी की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए गए।
- रोजगार और भर्ती पर जोर: राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनाए जा रहे हैं। हाल ही में पुलिस विभाग में 1600 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का एलान किया गया।
एक तरफ समर्थकों का मानना है कि धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून व्यवस्था के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। ऑल वेदर रोड परियोजना, केदारनाथ-बद्रीनाथ पुनर्निर्माण और कठोर नकल विरोधी कानून से युवाओं में विश्वास बढ़ा है। वहीं दूसरी तरफ, विपक्षी दल राज्य में बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरते रहते हैं।
हालांकि, कड़े प्रशासनिक फैसलों और सहज व्यवहार के कारण आम जनता के बीच उनकी लोकप्रिय छवि बनी हुई है। छात्र राजनीति से उठकर राज्य की कमान संभालने तक का उनका यह सफर आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। पुष्कर सिंह धामी की जीवनी से यह स्पष्ट होता है कि कड़ी मेहनत और सही नीयत से एक साधारण पृष्ठभूमि का व्यक्ति भी सफलता के शिखर तक पहुँच सकता है।