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देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव: सीएम पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा हुए शामिल, जानें बड़ी बातें

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 | 02:17 PM

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देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव: सीएम पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा हुए शामिल, जानें बड़ी बातें
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देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव: जानिए क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड की राजधानी के पास थानो में आयोजित देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के पांचवें दिन राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा शामिल हुए। इस भव्य सांस्कृतिक और साहित्यिक मंच पर देश-विदेश से आए कई विद्वानों, लेखकों और कलाकारों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य और कला किसी भी राज्य की असली पहचान होते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में पठन-पाठन की आदत को बढ़ाने के लिए ऐसे कार्यक्रम बहुत जरूरी हैं। इससे पहले राज्य में युवाओं को नई दिशा देने के लिए नशामुक्त उत्तराखंड वॉकथॉन देहरादून जैसी बड़ी पहल भी की जा चुकी है।


थानो का लेखक गांव अब साहित्य प्रेमियों के लिए एक नया केंद्र बन चुका है। पांच दिनों तक चले इस विशेष कार्यक्रम में भाषा, संस्कृति और लोक कलाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के दौरान स्थानीय उत्पादों और लोक संगीत की शानदार प्रदर्शनियां भी लगाई गईं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने लाने में यह गांव मील का पत्थर साबित होगा। देश के अलग-अलग राज्यों में होने वाले बड़े सांस्कृतिक आयोजनों जैसे कि गोरखपुर महोत्सव की विकास गाथा की तरह ही यह आयोजन भी राज्य की पर्यटन और सांस्कृतिक क्षमता को प्रदर्शित करता है।

चर्चा की तात्कालिक वजह और दिग्गजों की मौजूदगी

इस महोत्सव के पांचवें दिन केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव केवल किताबों या गोष्ठियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने का एक बेहतरीन जरिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखंड के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय युवाओं को नए अवसर मिलते हैं और उन्हें अपनी कला दिखाने का मंच मिलता है।

महोत्सव के मुख्य तकनीकी और सांस्कृतिक पहलू

  • साहित्यिक गोष्ठियाँ: हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊंनी और अन्य भारतीय भाषाओं के लेखकों ने अपनी रचनाएं साझा कीं।
  • तकनीकी सत्र: डिजिटल दौर में किताबों के महत्व और ई-बुक्स के प्रभाव पर गंभीर चर्चा हुई।
  • युवाओं की भागीदारी: स्कूली बच्चों और कॉलेज के छात्रों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
  • पर्यावरण संरक्षण का संदेश: कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण पर बल दिया गया, जैसा कि हाल ही में वन महोत्सव में वृक्षारोपण कार्यक्रम में देखा गया था।

सांस्कृतिक महत्व और पक्ष-विपक्ष का विश्लेषण

उत्तराखंड में साहित्यिक पर्यटन का विचार नया और क्रांतिकारी माना जा रहा है। देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के माध्यम से राज्य सरकार की कोशिश है कि ऋषिकेश और मसूरी के अलावा थानो जैसे क्षेत्रों को भी पर्यटन मानचित्र पर उभारा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय होटल उद्योग, हस्तशिल्प और परिवहन सेवाओं को बहुत फायदा मिलेगा। हालांकि, कुछ जानकारों का कहना है कि इसके लिए बेहतर सड़कों और यातायात प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था करनी होगी ताकि दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों और साहित्यकारों को कोई परेशानी न हो।

आम नागरिक और स्थानीय लोगों पर सीधा असर

इस आयोजन का सीधा असर थानो और आसपास के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। स्थानीय होमस्टे और छोटे व्यापारियों को इस पांच दिवसीय आयोजन से अच्छा रोजगार मिला है। देहरादून लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव से यह बात साबित होती है कि जब किसी क्षेत्र को सांस्कृतिक पहचान मिलती है, तो वहां के आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आता है। जिस तरह सामाजिक आयोजनों और मेलों से जनसमूह जुड़ता है, जैसे बलिया में सेंगर राजपूत मेला के माध्यम से लोग एकजुट हुए थे, ठीक उसी तरह यह महोत्सव भी सामाजिक समरसता को बढ़ावा दे रहा है।

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देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय टीम। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता।